दुनिया की सबसे बड़ी गोल्ड रिफाइनरी वेलकंभी स्वीटजरलैंड के बदलेना शहर में है रिफायनरी इटली की सीमा पर स्थित है इसकी क्षमता हर साल 2000 मैट्रिक टन सोना रिफाइन करने की है 1963 में स्थापित रिफाइनरी को भारतीय कंपनी राजेश एक्सपोर्ट्स ने 2015 में अधिग्रहित पिया था इसे करीब $400000000 मैं खरीदा गया था आज की कीमत में करीब 2880 करोड रुपए हैं इसके बाद यह विश्व में सर्वाधिक सोना एक्सपोर्ट और रिफाइन करने वाली कंपनी बन गई जब हम बेंगलुरु के को मारा कुरूपा पार्क के पास बता दिया चैंबर्स में कंपनी के ऑफिस पहुंचे तो दफ्तर के बाहर महंगी गाड़ियों का काफिला तक यही कंपनी के बेहद सुरक्षित कक्ष में चेयरमैन राजेश मेहता बैठे थे उनके केबिन तक जाने के लिए तीन स्तरीय सुरक्षा से गुजरना पड़ता है मेहता ने भास्कर से विशेष बातचीत में बताया कि रिफाइनरी में हर वर्ष करीब 12 टन सोना रिफाइन कर रहे हैं अमेरिका सहित यूरोप में अधिकांश देशों के सेंट्रल बैंक और प्रमुख बुलियन बैंक्स को यहां से सोना सप्लाई किया जाता है विश्व में सालाना खुल जा रहा है उसका जा रहा है इसके बाद ऑस्ट्रेलिया की पर्थमिंट रिफाइनरी है जिसकी वार्षिक क्षमता करीब 500 मीट्रिक टन है मेहता बताते हैं कि सोना भारी धातु है इसलिए मैन्युअल प्रोसेस में 1 फुट ऊंचे और आधा फुट ब्यास वाले बर्तन में हम करीब 30 किलो सोना डालते हैं जबकि ऑटोमेटिक प्रोसेस में इसी बर्तन में लगभग 100 किलो तक सोना डाला जा सकता है इस कंपनी के शहर में राजेश मेहता जी बताते हैं कि रिफाइनरी में ज्यादातर कार्य मशीन से होता है यह विश्व में एक मात्र ऐसी रिफाइनरी है जो बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के रोबोटिक प्रोसेस से गोल्ड बार बनाती है प्योरिटी सेक्टर इसकी प्रमुख खासियत है लंदन बुलियन मार्केट एसोसिएशन सहित उच्च गुणवत्ता के लिए दिए जाने वाले विश्व के प्रमुख सर्टिफिकेशन रिफाइनरी के पास है
रॉ मैटेरियल से 80% सोना निकलता है सोना करीब 11 डिग्री सेल्सियस तापमान पर पिघलता है फिर हाई टेक्नोलॉजी की रिफायनिंग होती है जिसके बाद शुद्ध सोना निकलता है विश्व के अलग-अलग खदानों से सोना यहां आता है रो मेटेरियल में से करीब 40 से 80 फ़ीसदी तक सोना निकलता है रिफाइनरी में 600 कर्मचारी है कर्मचारियों को काम सौंपने से पहले पूरी ट्रेनिंग दी जाती है जो 15 दिन से 1 महीने तक की होती है उन्हें विशेष प्रकार के कपड़े दिए जाते हैं जो इतने तापमान को सहन करने में सक्षम होते हैं
फॉर्च्यून 500 में भारत की शीर्ष सात कंपनियों में भी राजेश एक्सपोर्ट्स को जगह मिली है मेहता कहते हैं कि हम विश्व की अकेली कंपनी है जिसके पास सोने की रिफायनिंग से लेकर ग्राहकों को गहने बेचने तक पूरी वैल्यू चैन की सुविधा है कंपनी के गहनों में टांका नहीं होता लेजर से ज्वेलरी के ज्वाइंट जोड़े जाते हैं कंपनी का टर्नओवर करीब 2 पॉइंट 4000000 करोड रुपए है मुंबई स्टॉक एक्सचेंज के मुताबिक कंपनी की मार्केट के करीब 16851 करोड रुपए है
विश्व का 35% सोना यहां रिफाइन होता है
30 किलो सोने की कीमत ₹100000000
खदान में किसी आम पत्थर की तरह निकलने वाले सोना लंबी यात्रा कर आभूषण का रूप लेता है
खदान से आमतौर पर सोना मिश्र धातु के रूप में मिलता है या फिर विभिन्न एस के रूप में भी यह पाया जाता है सबसे पहले चट्टान के रूप में मिले इन्हें स्कोर को धोया जाता है वह मिल मैं छोटे-छोटे कणों में पीस लिया जाता है
विश ऊ ए ऐ स्कोर पारे की परत चढ़ी हुई प्लेटों से गुजारा जाता है सोना और पारा मिलकर अमलगम बनाते हैं इस अमलगम को तब तक गर्म किया जाता है जब तक पारा गैस बनकर में उड़ने जाए इस प्रक्रिया मैं आखिर में सोना बसता है
पिघले हुए सोने को बिस्किट या ईट के आकार में डाला जाता है जिसमें सोने के सिक्के बनाने से लेकर आभूषण बनाने तक शामिल है
रॉ मैटेरियल से 80% सोना निकलता है सोना करीब 11 डिग्री सेल्सियस तापमान पर पिघलता है फिर हाई टेक्नोलॉजी की रिफायनिंग होती है जिसके बाद शुद्ध सोना निकलता है विश्व के अलग-अलग खदानों से सोना यहां आता है रो मेटेरियल में से करीब 40 से 80 फ़ीसदी तक सोना निकलता है रिफाइनरी में 600 कर्मचारी है कर्मचारियों को काम सौंपने से पहले पूरी ट्रेनिंग दी जाती है जो 15 दिन से 1 महीने तक की होती है उन्हें विशेष प्रकार के कपड़े दिए जाते हैं जो इतने तापमान को सहन करने में सक्षम होते हैं
फॉर्च्यून 500 में भारत की शीर्ष सात कंपनियों में भी राजेश एक्सपोर्ट्स को जगह मिली है मेहता कहते हैं कि हम विश्व की अकेली कंपनी है जिसके पास सोने की रिफायनिंग से लेकर ग्राहकों को गहने बेचने तक पूरी वैल्यू चैन की सुविधा है कंपनी के गहनों में टांका नहीं होता लेजर से ज्वेलरी के ज्वाइंट जोड़े जाते हैं कंपनी का टर्नओवर करीब 2 पॉइंट 4000000 करोड रुपए है मुंबई स्टॉक एक्सचेंज के मुताबिक कंपनी की मार्केट के करीब 16851 करोड रुपए है
विश्व का 35% सोना यहां रिफाइन होता है
30 किलो सोने की कीमत ₹100000000
खदान में किसी आम पत्थर की तरह निकलने वाले सोना लंबी यात्रा कर आभूषण का रूप लेता है
खदान से आमतौर पर सोना मिश्र धातु के रूप में मिलता है या फिर विभिन्न एस के रूप में भी यह पाया जाता है सबसे पहले चट्टान के रूप में मिले इन्हें स्कोर को धोया जाता है वह मिल मैं छोटे-छोटे कणों में पीस लिया जाता है
विश ऊ ए ऐ स्कोर पारे की परत चढ़ी हुई प्लेटों से गुजारा जाता है सोना और पारा मिलकर अमलगम बनाते हैं इस अमलगम को तब तक गर्म किया जाता है जब तक पारा गैस बनकर में उड़ने जाए इस प्रक्रिया मैं आखिर में सोना बसता है
पिघले हुए सोने को बिस्किट या ईट के आकार में डाला जाता है जिसमें सोने के सिक्के बनाने से लेकर आभूषण बनाने तक शामिल है

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