Saturday, October 20, 2018

स्वच्छता अभियान

                               स्वच्छता

           विगत कुछ समय से हम स्वच्छता के संबंध में अधिक सुन और पढ़ रहे हैं ऐसे में हमें यह बोध होता है कि स्वच्छता एक नवीन विषय है जिस के संबंध में जानकारी देने की चेष्टा की जा रही है परंतु हमारी है सोच ब्रह्मास्त्र है क्योंकि हमारे देश में स्वच्छता की चर्चा हजारों वर्षों पूर्व तभी से की जा रही है जब से वेदों की रचना की गई है अगर हम यह सोचते हैं कि स्वच्छता मात्र कचरे को इधर-उधर नहीं पहनना या खुले में सोच नहीं करना है तो यह स्वच्छता का पूर्ण अर्थ नहीं है अब हमारे लिए यह आवश्यक होता है कि हम स्वच्छता के संदर्भ में विस्तार से चर्चा करेंगे स्वच्छता से तात्पर्य हुआ है एवं आंतरिक स्वच्छता है बाय स्वस्था संपूर्ण पर्यावरण की रक्षा से संबंधित है तो आंतरिक स्वच्छता शारीरिक एवं आदमी का चरण की शुद्धता से स्वच्छता जीवन का तथा सभ्यता का एक भजन है विश्व के हर एक धर्म में सफाई की ओर निर्देश करने वाले आचार्य नित्य पूजा पाठ से पूर्णा नदी या नमाज से पहले वजू यही इंगित करते हैं योगाभ्यास के वर्णन में सूची देश में आसन लगाए तथा असुरों के वर्णन में गीता का कथन है कि उनमें सुचिता नहीं होती सुचिता में स्वच्छता निर्मलता सम्मिलित है एक बार तथा दूसरी आंध्र हमारी सुंदरी प्रियता और सत करता के भाव का ज्ञान हमारे इस तथ्य से ज्ञात होता है कि हमें स्वच्छता का बोध है या नहीं पातंजल योग के नियमों में सोच का वर्णन इसी संदर्भ में आता है सोच का अर्थ है संस्था ने केवल मन और शरीर की अपितु एक दूसरे के साथ व्यवहार में भी पर हमारे मन में यह जिज्ञासा उत्पन्न होती है कि इस स्वच्छता का आधार क्या है साधारण शब्दों में सफाई कैसे होती है इस संबंध में कहा गया है कि आत्मा मंदबुद्धि और इंद्रियों की शुद्धि का नाम ही सोच है आत्मा की शुद्धि ज्ञान और उपासना से मन की सत्य और श्रेष्ठ विचारों से बुद्धि की निश्चित ज्ञान से शरीर की पवित्र अनुसेवक और जल से वाणी की सत्य और मधुर वचनों से कानों की पवित्र वेदो मंत्रों तथा अन्य श्रेष्ठ विचारों को सुनने से शुद्धि होती है

अस्वच्छता के कारण देश का आर्थिक नुकसान
क्या सोचता देश के आर्थिक नुकसान का कारण बनती है वहीं के एक अध्ययन के अनुसार पर्याप्त साफ सफाई और स्वच्छता की हर साल देश को चोपन अरब डॉलर कीमत चुकाने पड़ते हैं यह राशि 2006 में भारत में सकल घरेलू उत्पाद की 6 पॉइंट 4 प्रतिशत के बराबर है यही नहीं यह सती देश के कई राज्यों की कुल आय से भी अधिक है आपको यह समझना थोड़ा कठिन होगा कि स्वच्छता से देश को इतना नुकसान कैसे इसे समझने के लिए यह जानना होगा कि अगर किसी भी देश का नागरिक अस्वस्थ होता है तो उसके स्वास्थ्य लाभ के लिए सरकार को न केवल धन खर्च करना होता है बल्कि सबसे कार्य में साला गम नहीं होता तो भी देश के विकास को क्षति पहुंच रही होती है स्वच्छता के उचित तरीके अपनाकर भारत 32.6 डॉलर हर साल बचा सकता है यानी प्रति व्यक्ति ₹1321 का लाभ सुनिश्चित किया जा सकता है
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार जैसे माचिस की एक तीली संपूर्ण विश्व को पूरा करने की ताकत रखती है ठीक उसी तरह बहुत सूक्ष्म मात्रा में गंदगी बी महामारी फैल आ सकती है उदाहरण के लिए 1 ग्राम मल में एक और विषाणु हो सकते हैं 1000000 जीवन हो सकते हैं 1000 परजीवी हो सकते हैं और 100 जीवो के अंडे हो सकते हैं
विश्व बैंक के स्वाद के अनुसार शौचालय के इस्तेमाल में वर्दी के जाए स्वच्छता और साफ सफाई के तरीके अपनाएं जाए तो स्वास्थ्य पर पड़ने वाले समग्र प्रभाव को 45% तक कम किया जा सकता है या नहीं अगर सोचता की वजह से स्वछता समस्याओं से मुक्ति के लिए खर्च किए गए पैसे का कुछ हिस्सा भी सोचता सेवाओं को बेहतर बनाने और व्यवहार बदलने की ओर लगाया गया होता तो काफी अधिक लोग एक स्वस्थ जीवन का आनंद ले रहे होते एक्स मलेरिया और खसरे तीनों से संयुक्त रूप से मारे जाने वाले बच्चों की तुलना में अधिक बच्चे डायरिया से मर जाते डायरिया जैसी घातक बीमारी खुले मल के संपर्क में आने से प्रत्यक्ष रुप से जुड़ी है
इसके विपरीत अगर हम उस अवस्था को सुनते हैं तो न केवल देश को आर्थिक सुधरता देते हैं बल्कि एक मजबूत आधार शिला का भी निर्माण करते हैं स्वस्थ नागरिक किसी देश की निधि होती है और सोचता के प्रयास उस नदी का संरक्षण करते हैं भारत सोचता रिपोर्ट 2015 के अनुसार उत्तर पूर्वी राज्य मिजोरम में विकसित बच्चों की संख्या में 13% एवं कम वजन वाले बच्चों की संख्या 5% की कमी हुई है इस कमी का कारण सोचता में सुधार होना है मिजोरम में 2001 की जनसंख्या के मुताबिक बीएसए प्रतिशत घर में स्वच्छता की पहुंच थी जो कि 2011 की जनगणना में बढ़कर 92% हो गई बच्चों के पोषण के संबंध में जिन राज्यों की स्थिति बेहतर है वहां सोचता और बच्चे के पोषण के बीच एक मजबूत संबंध दिखाई देता है इसका सबसे उत्कृष्ट उदाहरण मिजोरम है जहां 2006 से 2014 के बीच विकसित बच्चों की संख्या में कमी हुई पोषण मांगों के संदर्भ में राज्यों की स्थिति सबसे खराब है ऐसे घरों की संख्या बहुत कम है जहां शौचालय पिछले दशकों में किए गए दिनों में पोषण में सुधार के लिए साफ-सफाई रखने पर अधिक जोर दिया गया है इस संबंध में बांग्लादेश का उदाहरण अतुलनीय है अंतर्राष्ट्रीय खाद्य नीति अनुसंधान संस्थान की एक रिपोर्ट के अनुसार 1990 और 2012 के बीच बांग्लादेश में कुपोषण में कमी होने के साथ खुले में शौच जाने के आंकड़े 34% से घटकर 2% रह गए हैं
भारत में स्वच्छता के प्रयास
भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने स्वच्छ भारत अभियान चलाया है इसका प्रचार-प्रसार मीडिया के माध्यम से निरंतर किया जा रहा है अनेक जनप्रतिनिधि अधिकारी कर्मचारी प्रसिद्ध लोग इसमें भाग ले रहे हैं जनता को इसमें अपने स्तर से पूरा सहयोग देना चाहिए इसके साथ गांव में खुले में शौच करने की प्रथा को समाप्त करने के लिए गए लोगों के घरों में शौचालय बनवाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है उसके लिए आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है इन अभियानों से समाज के प्रत्येक  को पूरा सहयोग करना चाहिए
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