गरीबी उन्मूलन रोजगार कार्यक्रम
गरीबी निवारण के लिए संचालित पूर्ववर्ती कार्यक्रमों में वर्तमान में संचालित कार्यक्रमों का वर्णन इस प्रकार है
(1) स्वरोजगार हेतु ग्रामीण युवक प्रशिक्षण:
15 अगस्त 1979 को केंद्र समर्थित योजना के रूप में शुरू किया गया इसमें गरीबी रेखा से नीचे के परिवारों से 18 से 35 वर्ष आयु के युवकों को कृषि एवं समृद्ध क्रियाकलापों उद्योग सेवाओं एवं व्यापार में स्वरोजगार हेतु दक्षता प्राप्त करने के लिए प्रशिक्षण दिया जाता है प्रशिक्षण के बाद प्राइस लाभार्थियों को समन्वित ग्रामीण विकास कार्यक्रम के अंतर्गत मदद दी जाती है इस योजना के तहत 1980 से 98 तक 4148425 युवकों को प्रशिक्षित किया गया 2332274
युवक रोजगार में लग गए थे
(2) एकीकृत ग्रामीण विकास कार्यक्रम:
यह योजना 1978 से 79 में प्रारंभ की गई 11 केंद्र समृद्धि योजना थी इसका उद्देश्य गरीब परिवारों का कोई न कोई परिसंपत्ति दी जाए ताकि उसका उपयोग करके वह अपनी आमदनी बढ़ा सके और गरीबी रेखा से पर आ सके कार्यक्रम में दुधारू पशु गाय भेड़ बकरी बैलगाड़ी सिलाई की मशीन हथकरघा आधी साधन प्रदान करने के लिए सरकार अनुदान देती थी बैंक से ऋण दिलवाया जाता था
(3) जवाहर रोजगार योजना:
ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार बढ़ाने की दृष्टि से यह योजना 1989-90 मे प्रारंभ की गई थी इसमें केंद्र का आंसर से प्रतिशत में राज्यों का 20% तक रखा गया था इस कार्यक्रम के अंतर्गत पेयजल के लिए कुओं का निर्माण स्कूल भवन दवाखाने ग्रामीण सड़कें लघु सिंचाई व संरक्षण आदि के कार्य किए जाते थे लोगों का पोषण स्तर ऊंचा उठाने के लिए काम के बदले अनाज भी दिया जाता था इससे पूर्व ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के दो कार्यक्रम चलाए गए थे
*राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार कार्यक्रम तथा
*ग्रामीण भूमिहीन रोजगार गारंटी कार्यक्रम 1989- 90 में दोनों कार्यक्रम योजना में मिला दिए गए
(4) ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं एवं बच्चों का विकास:
इसमें गरीब परिवार की महिलाओं की आय में वृद्धि हेतु 5 -10 महिलाओं का समूह बनाकर ₹15000 की आवृत्ति धनराशि प्रदान की जाती है 1980-81 से 1997-98 के बीच इस योजना के तहत महिलाओं को सहायता प्रदान की गई
(5) जिला गरीबी उन्मूलन परियोजना:
यह योजना 22 जुलाई 2000 को विश्व बैंक के सहयोग से प्रारंभ की गई यह ग्रामीण गरीबों को ढेर सरकारी संस्थाओं के माध्यम से जोड़कर उनके संतों का विकास करके उनका सशक्तिकरण करने के लिए बनाई गई इससे एनजीओ एस के द्वारा कॉमन इंटरेस्ट ग्रुप बनाकर संचालित किया गया इस प्रोजेक्ट के तहत सामुदायिक आधार ढांचा भूमि आधारित सामाजिक सेवाएं सर्जन के कार्य किए गए
(6) प्रधानमंत्री आवास योजना:
इसमें गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले अनुसूचित जाति जनजाति मुक्त बधुआ मजदूर ग्रामीण गरीबों और युद्ध में शहीद सैनिकों की विधवाओं निकटतम संबंधियों को आवास निर्माण हेतु पर्वतीय क्षेत्रों में ₹75000 मैदानी भागों में ₹70000 प्रति आवास प्रदान किए गए हैं यह योजना मई 1985 - 86 से शुरू हुई और 2016 में प्रधानमंत्री आवास योजना में नाम परिवर्तित किया गया जिसमें कच्चे मकान वाले परिवार को शौचालय सहित ₹148000 प्रदान किए जाएंगे
(7) राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन:
इस योजना को 30 मई 2005 में प्रारंभ किया गया है इससे देश में गरीब ग्रामीण जनता तक स्वास्थ्य सेवाओं को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से शुरू किया गया इस योजना के उद्देश्य निम्न रखे गए हैं
* ग्रामीण विशेषकर समाज के कमजोर वर्गों महिलाओं और बच्चों को प्रभावित स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करना
* शिशु एवं मातृ मृत्यु दर में कमी लाना
* जनसंख्या स्थिरीकरण लिंग एवं जनसंख्या की संतुलन सुनिश्चित करना
(8) गंगा कल्याण योजना:
इसके अंदर समर्थित योजना को एक फरवरी 1997 को गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले लघु एवं सीमांत कृषकों को नलकूप पंपिंग सेट लगाने के लिए अर्थ सहयोग और मियादी ऋण की सुविधा दी जाने के लिए किया गया है इसमें 50% लाभार्थी अनुसूचित जाति जनजाति के होते हैं खर्च का 80% भाग केंद्र 20% राज्य सरकार द्वारा वहन किया जाता है
(9) राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम:
इसकी शुरुआत 15 अगस्त 1995 को की गई
* इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना में 65 वर्षीय उपेक्षित वर्ग की प्रतिमाएं ₹700 में 7 वर्ष तक ₹500 प्रति माह पेंशन योजना
* राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना में घर के पालन करता की मौत पर परिवार वालों को ₹30000 दिए जाते हैं
* राष्ट्रीय योजना में गरीबी रेखा से नीचे की 19 वर्ष से अधिक आयु वाली गर्भवती महिलाओं को 14 सो रुपए लड़की के जन्म पर राजश्री योजना में ₹50000 बालिका के सरकारी विद्यालय से पढ़ाई कराने पर प्रदान किए जाते हैं
(10) अन्नपूर्णा योजना:
यह 1 अप्रैल 2001 से शुरु की गई जिसका उद्देश्य प्रतिमा या वरिष्ठ नागरिकों को 10 किलो अनाज देने की योजना शामिल है
(11) स्वर्ण जयंती ग्राम स्वरोजगार योजना:
यह कार्यक्रम पूर्व में संचालित( स्वरोजगार हेतु ग्रामीण युवक प्रशिक्षण, एकीकृत ग्रामीण विकास कार्यक्रम, जवाहर रोजगार योजना, ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं एवं बच्चों का विकास,) नमक से कार्यक्रमों को मिलाकर एक अप्रैल 1999 से भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय की तरफ से चलाया गया था इसमें भारत सरकार में राजस्थान सरकार की भागीदारी 75:25 इसके तहत स्वरोजगार यू को निर्धनता की रेखा से ऊपर उठाने के लिए तथा उनकी आमदनी बढ़ाने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में लघु कर्मों में काम पर लगाने की व्यवस्था की जाती है इसमें समूह के आधार पर स्वरोजगार अधिकतम किया जाता था इसके अंतर्गत सब्सिडी की व्यवस्था की गई थी इससे अनुसूचित जाति जनजाति के लोगों को विशेष लाभ पहुंचाया जाता है
गरीबी निवारण के लिए संचालित पूर्ववर्ती कार्यक्रमों में वर्तमान में संचालित कार्यक्रमों का वर्णन इस प्रकार है
(1) स्वरोजगार हेतु ग्रामीण युवक प्रशिक्षण:
15 अगस्त 1979 को केंद्र समर्थित योजना के रूप में शुरू किया गया इसमें गरीबी रेखा से नीचे के परिवारों से 18 से 35 वर्ष आयु के युवकों को कृषि एवं समृद्ध क्रियाकलापों उद्योग सेवाओं एवं व्यापार में स्वरोजगार हेतु दक्षता प्राप्त करने के लिए प्रशिक्षण दिया जाता है प्रशिक्षण के बाद प्राइस लाभार्थियों को समन्वित ग्रामीण विकास कार्यक्रम के अंतर्गत मदद दी जाती है इस योजना के तहत 1980 से 98 तक 4148425 युवकों को प्रशिक्षित किया गया 2332274
युवक रोजगार में लग गए थे
(2) एकीकृत ग्रामीण विकास कार्यक्रम:
यह योजना 1978 से 79 में प्रारंभ की गई 11 केंद्र समृद्धि योजना थी इसका उद्देश्य गरीब परिवारों का कोई न कोई परिसंपत्ति दी जाए ताकि उसका उपयोग करके वह अपनी आमदनी बढ़ा सके और गरीबी रेखा से पर आ सके कार्यक्रम में दुधारू पशु गाय भेड़ बकरी बैलगाड़ी सिलाई की मशीन हथकरघा आधी साधन प्रदान करने के लिए सरकार अनुदान देती थी बैंक से ऋण दिलवाया जाता था
(3) जवाहर रोजगार योजना:
ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार बढ़ाने की दृष्टि से यह योजना 1989-90 मे प्रारंभ की गई थी इसमें केंद्र का आंसर से प्रतिशत में राज्यों का 20% तक रखा गया था इस कार्यक्रम के अंतर्गत पेयजल के लिए कुओं का निर्माण स्कूल भवन दवाखाने ग्रामीण सड़कें लघु सिंचाई व संरक्षण आदि के कार्य किए जाते थे लोगों का पोषण स्तर ऊंचा उठाने के लिए काम के बदले अनाज भी दिया जाता था इससे पूर्व ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के दो कार्यक्रम चलाए गए थे
*राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार कार्यक्रम तथा
*ग्रामीण भूमिहीन रोजगार गारंटी कार्यक्रम 1989- 90 में दोनों कार्यक्रम योजना में मिला दिए गए
(4) ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं एवं बच्चों का विकास:
इसमें गरीब परिवार की महिलाओं की आय में वृद्धि हेतु 5 -10 महिलाओं का समूह बनाकर ₹15000 की आवृत्ति धनराशि प्रदान की जाती है 1980-81 से 1997-98 के बीच इस योजना के तहत महिलाओं को सहायता प्रदान की गई
(5) जिला गरीबी उन्मूलन परियोजना:
यह योजना 22 जुलाई 2000 को विश्व बैंक के सहयोग से प्रारंभ की गई यह ग्रामीण गरीबों को ढेर सरकारी संस्थाओं के माध्यम से जोड़कर उनके संतों का विकास करके उनका सशक्तिकरण करने के लिए बनाई गई इससे एनजीओ एस के द्वारा कॉमन इंटरेस्ट ग्रुप बनाकर संचालित किया गया इस प्रोजेक्ट के तहत सामुदायिक आधार ढांचा भूमि आधारित सामाजिक सेवाएं सर्जन के कार्य किए गए
(6) प्रधानमंत्री आवास योजना:
इसमें गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले अनुसूचित जाति जनजाति मुक्त बधुआ मजदूर ग्रामीण गरीबों और युद्ध में शहीद सैनिकों की विधवाओं निकटतम संबंधियों को आवास निर्माण हेतु पर्वतीय क्षेत्रों में ₹75000 मैदानी भागों में ₹70000 प्रति आवास प्रदान किए गए हैं यह योजना मई 1985 - 86 से शुरू हुई और 2016 में प्रधानमंत्री आवास योजना में नाम परिवर्तित किया गया जिसमें कच्चे मकान वाले परिवार को शौचालय सहित ₹148000 प्रदान किए जाएंगे
(7) राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन:
इस योजना को 30 मई 2005 में प्रारंभ किया गया है इससे देश में गरीब ग्रामीण जनता तक स्वास्थ्य सेवाओं को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से शुरू किया गया इस योजना के उद्देश्य निम्न रखे गए हैं
* ग्रामीण विशेषकर समाज के कमजोर वर्गों महिलाओं और बच्चों को प्रभावित स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करना
* शिशु एवं मातृ मृत्यु दर में कमी लाना
* जनसंख्या स्थिरीकरण लिंग एवं जनसंख्या की संतुलन सुनिश्चित करना
(8) गंगा कल्याण योजना:
इसके अंदर समर्थित योजना को एक फरवरी 1997 को गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले लघु एवं सीमांत कृषकों को नलकूप पंपिंग सेट लगाने के लिए अर्थ सहयोग और मियादी ऋण की सुविधा दी जाने के लिए किया गया है इसमें 50% लाभार्थी अनुसूचित जाति जनजाति के होते हैं खर्च का 80% भाग केंद्र 20% राज्य सरकार द्वारा वहन किया जाता है
(9) राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम:
इसकी शुरुआत 15 अगस्त 1995 को की गई
* इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना में 65 वर्षीय उपेक्षित वर्ग की प्रतिमाएं ₹700 में 7 वर्ष तक ₹500 प्रति माह पेंशन योजना
* राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना में घर के पालन करता की मौत पर परिवार वालों को ₹30000 दिए जाते हैं
* राष्ट्रीय योजना में गरीबी रेखा से नीचे की 19 वर्ष से अधिक आयु वाली गर्भवती महिलाओं को 14 सो रुपए लड़की के जन्म पर राजश्री योजना में ₹50000 बालिका के सरकारी विद्यालय से पढ़ाई कराने पर प्रदान किए जाते हैं
(10) अन्नपूर्णा योजना:
यह 1 अप्रैल 2001 से शुरु की गई जिसका उद्देश्य प्रतिमा या वरिष्ठ नागरिकों को 10 किलो अनाज देने की योजना शामिल है
(11) स्वर्ण जयंती ग्राम स्वरोजगार योजना:
यह कार्यक्रम पूर्व में संचालित( स्वरोजगार हेतु ग्रामीण युवक प्रशिक्षण, एकीकृत ग्रामीण विकास कार्यक्रम, जवाहर रोजगार योजना, ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं एवं बच्चों का विकास,) नमक से कार्यक्रमों को मिलाकर एक अप्रैल 1999 से भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय की तरफ से चलाया गया था इसमें भारत सरकार में राजस्थान सरकार की भागीदारी 75:25 इसके तहत स्वरोजगार यू को निर्धनता की रेखा से ऊपर उठाने के लिए तथा उनकी आमदनी बढ़ाने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में लघु कर्मों में काम पर लगाने की व्यवस्था की जाती है इसमें समूह के आधार पर स्वरोजगार अधिकतम किया जाता था इसके अंतर्गत सब्सिडी की व्यवस्था की गई थी इससे अनुसूचित जाति जनजाति के लोगों को विशेष लाभ पहुंचाया जाता है

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