Monday, October 15, 2018

परिवार नियोजन

परिवार नियोजन
 परिवार नियोजन का अर्थ है दंपतियों द्वारा इच्छा अनुसार बच्चों को जन्म देकर परिवार को सीमित रखने के लिए योजना तैयार करना जिससे कि परिवार शारीरिक मानसिक आर्थिक एवं संवेगात्मक रूप से सुखी संतुष्ट एवं प्रसन्न रह सके
परिवार नियोजन का उद्देश्य मातृ जन्म दर को ही नियंत्रित नहीं करना है बल्कि परिवार के सभी सदस्यों के कल्याण एवं स्वास्थ्य की देखभाल भी करना है
 भारत में परिवार नियोजन की स्थापना सन 1950 में हुई थी पंचवर्षीय योजनाओं के अंतर्गत परिवार नियोजन सेवाओं और शिक्षा कार्यक्रमों का विकास और प्रकार किया जाता है प्रतिवर्ष 11 जुलाई को जनसंख्या दिवस मनाया जाता है वर्तमान समय में परिवार नियोजन का नाम बदलकर परिवार कल्याण रखा गया है
लड़के की चाहत तथा बालिका की उपेक्षा:
सरकार द्वारा परिवार कल्याण कार्यक्रम स्तर पर चलाए जाने के बावजूद भी जनसंख्या वृद्धि पर नियंत्रण नहीं हो पाया है इसका एक प्रमुख कारण है हमारे पुरुष प्रधान समाज में वंश वर्दी के लिए इस लड़के की चाहत पुत्र को वंश घटक माना जाता है यानी कि वह धारणा है कि पुत्र के बिना वंश समाप्त हो जाएगा यही वजह है कि पुत्र की चाहत हर समुदाय व आर्थिक स्तर के परिवारों में अत्यधिक होती है इससे एक और तो परिवार का आकार बढ़ता है तो दूसरी ओर इस पुत्र चाहे से बालिका भ्रूण हत्या को प्रोत्साहन मिला है फलस्वरूप समाज में लड़कियों का अनुपात लड़कों की अपेक्षा गिरता जा रहा है यह भविष्य के लिए एक खतरे का विषय है मनुष्य जाति की रक्षा हेतु आवश्यक है कि बालक की तरह बालिका को समाज में जीने का अधिकार मिले तथा जन्म के पश्चात उसे बालक के समान भोजन शिक्षा वस्त्र स्वास्थ्य आदि की पर्याप्त सुविधाएं मिलें
 आज स्थिति बदल रही है शिक्षा तथा रोजगार के द्वारा बालिकाएं समाज में सम्मानित स्थान पा रही है किंतु फिर भी अभी स्थिति को और सुधारने की जरूरत है जिसकी जिम्मेदारी युवा तथा किशोर वर्ग की है जनसंख्या शिक्षा द्वारा बढ़ती जनसंख्या से उत्पन्न समस्याओं को अवगत कराते हुए परिवार को नियोजित व सीमित रखने के लिए परिवार कल्याण कार्यक्रम के बारे में किशोरों एवं किशोरियों को जानकारी दी जाए
जनसंख्या पर नियंत्रण के लिए परिवार नियोजन के कार्यक्रमों का प्रचार प्रसार करना होगा उन्हें लोकप्रिय बनाना होगा जनसाधारण में लड़कों का मोह हटाना होगा और आम जनता को शिक्षित बनाना होगा सरकार को कम संतान उत्पन्न करने वाले दंपतियों को सम्मानित करना चाहिए या कोई पुरस्कार देना चाहिए जिससे लोग उत्साहित होकर संतान   उत्पत्ति
 में कमी लाए
जनसंख्या शिक्षा:
हमारे देश में जनसंख्या वृद्धि के कारण जैसे कम उम्र में शादी होना शिक्षा गरीबी निबंध जीवन स्तर परिवार नियोजन की जानकारी का अभाव पुत्र की चाहत जितने हाथ उतना काम की विचारधारा धार्मिक अंधविश्वास आदि भारत की तेज रफ्तार से बढ़ती हुई आबादी हमारे चहुंमुखी विकास के लिए बातचीत हो रही है उसे बढ़ती आबादी किधर को घटाने के लिए यह जरूरी है कि प्रत्येक नागरिक चेतना की भावना को जागरुक कर परिवार को सीमित एवं स्वस्थ रखने के तरीकों की तरफ प्रेरित किया जाए
जनसंख्या वृद्धि को नियंत्रण में लाने का सबसे कामयाब तरीका है कि हम अपने परिवार को सीमित रखें इसके लिए सरकार ने तीसरी पंचवर्षीय योजना के तहत परिवार नियोजन कार्यक्रम जिसे अब परिवार कल्याण कार्यक्रम कहते हैं चला रखा है इस कार्यक्रम का उद्देश्य राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था के अनुरूप जन्म दर को घटाकर जनसंख्या को रखना है भारत ही पहला देश है जिसने परिवार नियोजन को योजनाबद्ध तरीके से संजोकर क्रियान्वित किया है
जनसंख्या वृद्धि के कारण
(1) जन्म दर का मृत्यु दर से अधिक होना
(2) जल्दी शादी और सार्वभौमिक विवाह प्रणाली
(3) गरीबी और निरक्षरता
(4) पुराने सांस्कृतिक आदर्श
(5) अवैध प्रवासी
जनसंख्या की बढ़ोतरी से उत्पन्न समस्या
(1) भूखमरी
(2) स्वच्छता का अभाव
(3) स्वच्छ पीने योग्य पानी की कमी
(4) आवास की कमी
(5) आवागमन की समस्याएं
(6) अपर्याप्त वस्त्र
(7) सीमित चिकित्सा एवं  शिक्षा सुविधा

भारत को आजादी के इतने वर्षों बाद भी अनेक समस्याओं से ग्रसित है उनमें से सबसे गंभीर भयंकर समस्या बढ़ती जनसंख्या है एक समस्या अनेक समस्याओं के मूड में है गरीबी बेरोजगारी करते संसाधन भ्रष्टाचार एक सामाजिक समस्या आदि अनेक समस्याओं की जड़ यही है 2011 की जनगणना के अनुसार भारत की आबादी 1 अरब 21 करोड़ है इसमें 62 करोड़ पुरुष और 58 करोड़ महिलाएं हैं यदि के बाद भारत का जनसंख्या में स्थान है परंतु वह दिन दूर नहीं जब भारत चीन से भी आगे निकल जाएगा अध्ययन से पता चलता है कि भारत चीन को भी पीछे छोड़ देगा  और ज्यादा आबादी वाला देश बन जाएगा


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