Saturday, October 6, 2018

राजस्थान एक परिचय

                      राजस्थान एक परिचय 

संस्कृति संपदा की दृष्टि से संपन्न हुए समृद्ध भक्ति और शौर्य का संगम स्थल बताएं साहित्य कला एवं संस्कृति की त्रिवेणी राजस्थान हमारे देश का क्षेत्रफल की दृष्टि से सबसे बड़ा राज्य है यह देश के उत्तर पश्चिमी भाग में स्थित है यहां का सांस्कृतिक वैभव बेजोड़ है साहसी वीर गौरव में संस्कृति त्याग एवं बलिदान की प्रतिमूर्ति नारियों शौर्य उदारता आदि भावनाओं का सर्वाधिक संचार मानव संपूर्ण विश्व में ऐसी भूमि पर हुआ है राजस्थान के लगभग मध्य से निकलने वाली तथा इसे दो चल रहा है भागो में विभक्त करने वाली वे राज्य की रीड की हड्डी कही जाने वाली अरावली पर्वत माला है उससे प्रभावित होने वाले अनेक महत्वपूर्ण सरिता यथा बनास बैंक बाणगंगा लूनी आदि प्रागैतिहासिक काल से लेकर आज तक ही मानव सभ्यताओं के उत्थान एवं पतन के साक्षी रही है इस भूभाग में निम्न पुरापाषाण युग उत्तर पाषाण काल काशी योगेश सिंधु सभ्यता की मानव बस्तियां प्राचीनतम ताम्र युगीन मानव सभ्यता एवं वैदिक सभ्यता खुली खुली और चिरकाल में इसी भूमि के गर्भ में विलीन हो गई जिनके अवशेष उत्खनन में यदा कदा पुरातात्विक अवशेषों के रूप में मिलते रहे हैं जो यहां की समृद्ध प्राचीन धरोहर का ज्रिक दर्शन कराते हैं यहां की शौर्य गाथा वीरों के पराक्रम के किस्से लोग धर्म  विराट विरासत सदियों से तपस्वी मनुष्य की तरह रेत की चादर ओढ़े निस्वार्थ भाव से भारत माता की सांस्कृतिक विरासत को अपना सब कुछ न्योछावर करती रही है और उसे विश्व में और समृद्ध बनाते रहिए

इस मरू प्रधान प्रदेश को समय-समय पर विभिन्न नामों से पुकारा जा रहा है महेश्वरी वाल्मीकि ने इस भूभाग के लिए मरू कांता रे शब्द का प्रयोग किया राजस्थान शब्द का प्राचीनतम प्रयोग राजस्थानी आदित्य वसंतगढ सिरोही के शिलालेख में हुआ इसके बाद मुंहनोत नैंसी री ख्यात एवं राज रूपक नामक ग्रंथों में भी राजस्थान शब्द का प्रयोग हुआ
छठी शताब्दी में इस राजस्थानी भूभाग में राजपूत शासकों ने अलग-अलग रियासतें कायम कर अपना शासन स्थापित किया इन रियासतों में मेवाड़ के गुहिल मारवाड़ के राठौड़ ढूंढ के कछवाहा में अजमेर के चौहान आदि प्रसिद्ध राजपूत वंश है राजपूत राज्य की प्रधानता के कारण ही कालांतर में इसे भू भाग को राजपूताना कहा जाने लगा राजस्थानी भूभाग के लिए राजपूताना शब्द का सर्वप्रथम प्रयोग 18 साल में जॉर्ज थॉमस द्वारा किया गया कर्नल जेम्स टॉड ने इस राज्य पर देश को राजस्थान कहा क्योंकि कुछ समय स्थानीय बोलचाल एवं लौकिक साहित्य में राजाओं के निवास के प्रांत को राजस्थान के तथ्य ब्रिटिश काल में यह प्रांत राजपूताना या रजवाड़ा तथा अजमेर मेरवाड़ा के नाम से पुकारा जाता था इस भौगोलिक भूभाग के लिए राजस्थान शब्द का सर्वप्रथम प्रयोग कर्नल जेम्स टॉड ने राजस्थान के इतिहास पर 1829 में लंदन से प्रकाशित अपनी प्रसिद्ध ऐतिहासिक करती इसका नाम सेंट्रल एंड वेस्टर्न राजपूत स्टेट ऑफ इंडिया में किया स्वतंत्रता पश्चात राज्य पुनर्गठन की प्रक्रिया के दौरान अलग-अलग नामकरण के पश्चात 26 जनवरी 1950 को औपचारिक रूप से इस संपूर्ण देश का नाम राजस्थान स्वीकार किया गया स्वतंत्रता के समय राजस्थान देसी रियासतों 3 ठिकाने कुशलगढ़ लावावे नीमराणा तथा चीफ कमिश्नर अजमेर मेरवाड़ा प्रदेश में विभक्त था स्वतंत्रता के बाद 1950 तक अजमेर मेरवाड़ा को छोड़कर सभी पत्र राजस्थान में सम्मिलित हो गए थे उस समय अजमेर मेरवाड़ा के प्रथम एवं एकमात्र मुख्यमंत्री राजस्थान अपने वर्तमान स्वरूप में 1 नवंबर 1956 में आया

               राजस्थान निर्माण के विभिन्न चरण
प्रथम चरण
प्रथम चरण का नाम मत्स्य संघ रखा गया इसका निर्माण 18 मार्च 1948 को किया गया
 इसमें शामिल होने वाली निम्न रियासते थी अलवर भरतपुर धौलपुर करौली रियासत में नीमराणा ठिकाना

द्वितीय चरण
दितीय चरण का नाम राजस्थान संग रखा गया एवं इसकी स्थापना 25 मार्च 1948 को की गई
 इसमें शामिल होने वाली निम्न रियासतें थी बांसवाड़ा बूंदी डूंगरपुर झालावाड़ कोटा प्रतापगढ़ टो किशनगढ़ ए तथा सहार पुरा रियासते हुए कुशलगढ़ ठिकाना प्रदेश के नाम से में राजस्थान शब्द पहली बार जुड़ा

तृतीय चरण
तृतीय चरण का नाम संयुक्त राजस्थान रखा गया इसकी स्थापना 18 अप्रैल 1948 को की गई
इसमें शामिल होने वाली रियासते हैं निम्न थे राजस्थान संघ में उदयपुर रियासत मिली

चतुर्थ चरण
चतुर्थ चरण में राजस्थान को व्रत राजस्थान नामक नाम दिया गया इसकी स्थापना 30 मार्च 1949 को की गई
 इसमें शामिल होने वाली निम्न रियासतें थी संयुक्त राजस्थान वह जयपुर जोधपुर बीकानेर से जैसलमेर
राजस्थान का गठन इसी तिथि को माना जाता है तथा यह दिन प्रतिवर्ष राजस्थान दिवस के रूप में मनाया जाता है
7 अप्रैल 1950 को राजस्थान के प्रथम प्रधानमंत्री हीरालाल शास्त्री ने शपथ ग्रहण की

पंचम चरण
पंचम चरण में राजस्थान का संयुक्त वृहत्तर राजस्थान नाम रखा गया इसकी स्थापना 15 मई 1949 को की गई इसके अंदर व्रत राजस्थान में मत्स्य संघ का विलय हुआ

छठा  चरण
छठे चरण में राजस्थान नाम रखा गया इसकी स्थापना जनवरी 1950 में की गई
इसके अंदर शामिल होने वाली निम्न रियासते थी
 इसमें संयुक्त वृहत राजस्थान में सिरोही रियासत का विलय हुआ 26 जनवरी 1950 को देश का संविधान लागू होने पर इस राज्य को विधिवत रूप से राजस्थान नाम दिया गया

सातवां चरण
सातवें चरण में राजस्थान अपने वर्तमान स्वरूप में आया
1 नवंबर 1956 राजस्थान संघ व अजमेर मेरवाड़ा व आबू दिलवाड़ा तहसील व मध्यप्रदेश का सीमेंट का राज्य में शामिल हुए राज्य के झालावाड़ जिले में एक भाग सिरोंज क्षेत्र को मध्य प्रदेश में मिलाया गया

         राजस्थान के प्रमुख राजवंश व राज्य
राजवंश        -        रियासत
प्रतिहार      - मंडोर भीनमाल जालौर राम
कछुआ        - जयपुर अलवर राम गोहिल मेवाड़ बांसवाड़ा डूंगरपुर उदयपुर चित्तौड़गढ़ राम
 सिसोदिया   -उदयपुर चित्तौड़गढ़ शाहपुरा प्रतापगढ़ राम
चौहान       - अजमेर जालौर सिवाना बूंदी सिरोही कोटा राम
 यादव       - करौली जैसलमेर हनुमानगढ़ राम राठौड़ जोधपुर किशनगढ़ बीकानेर राम
 भाटी    - जैसलमेर हनुमानगढ़ राम
 परमार    - आबू किराडू मालवा राम
 जाला   -  झालावाड़ राम
हाड़ा चौहान   -कोटा बूंदी राम
 जाट      - भरतपुर धौलपुर राम
 मुस्लिम    - टोंक राम
 देवड़ा चौहान - सिरोही राम
 सोनगरा चौहान  - जालौर
 चावड़ा   - भीनमाल राम

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